Wednesday, May 12, 2021

12 मई - विश्व नर्स दिवस

 


आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन 12 मई के दिन विश्व नर्स दिवस मनाया जाता है। फ्लोरेंस नाइटिंगेल एक नर्स थी। उन्होंने 19वीं सदी में युद्ध के दौरान घायल सैनिकों की मरहम-पट्टी और इलाज किया था। उन्होंने अन्य कई महिलाओं को नर्सिंग करना सिखाना शुरू किया और उनको नर्सिंग की ट्रेनिंग दी। रात में फ्लोरेंस नाइटिंगेल हाथ में एक लैंप लेकर अस्पताल के वार्डों में घूमती रहती थीं। इसलिए उन्हें "लेडी विद द लैंप" कहा जाने लगा।

सन् 1860 में फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने लंदन में सेंट थॉमस अस्पताल की स्थापना की। यह अस्पताल दुनिया का पहला नर्सिंग स्कूल था जहां मरीजों के इलाज के साथ महिलाओं हेतु नर्सिंग के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था थी। फ्लोरेंस नाइटिंगेल को सन् 1907 में ऑर्डर ऑफ मैरिट से सम्मानित किया गया था।

रोगी की देखभाल करने के लिए एक प्रशिक्षित व अनुभवी नर्स होना बहुत आवश्यक है। नर्स की सेवा और देखभाल के बिना किसी रोगी का स्वस्थ होना संभव नहीं है। इन्ही नर्सों के समाज में योगदान को सम्मान देने के लिए विश्व नर्स दिवस मनाया जाता है।

Saturday, May 8, 2021

8 मई - विश्व थैलेसीमिया दिवस

 


थैलेसीमिया रोग रक्त से संबंधित बीमारी है। यह  निश्चित तौर पर एक अनुवांशिक रोग है। इसमें रोगी के शरीर में रक्त निर्माण नहीं हो पाता या बहुत कम मात्रा में नया रक्त बनता है जिस वजह से मरीज को बार-बार बाहरी तरीके से खून चढ़ा कर रक्त की कमी पूरी की जाती है। 

थैलेसीमिया रोग बच्चे को जन्म से ही हो जाता है। इसलिए बच्चे के साथ उसके माता-पिता और पूरा परिवार इस रोग के कष्ट को झेलते हैं। विश्व थैलेसीमिया दिवस के मानने के पीछे यही उद्देश्य है कि संसार में किसी माता-पिता को इस रोग का दंश न झेलना पड़े। 

थैलेसीमिया रोग के बारे में देश के प्रत्येक नागरिक को जागरूक करना, रोग से संबंधित जानकारी देना यह दिन मनाये जाने का खास कारण है।

 इस रोग का अभी तक कोई सफल इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। जो भी उपाय किये जाते हैं वह महज मरीज की जिंदगी कुछ साल आगे बढ़ा देते हैं। थैलेसीमिया एक जन्मजात और अनुवांशिक बीमारी है। यह माता-पिता या दोनों में से किसी एक के जिंस में असामान्यता के कारण बच्चों में प्रकट होता है। मानव रक्त हीमोग्लोबिन से बनता है और हीमोग्लोबिन दो तरह के प्रोटीन से मिलकर बनता है-  अल्फा व बीटा ग्लोबिन। इन दो प्रोटीन में से किसी एक के जिंस में कोई असामान्य बदलाव होने पर थैलेसिमिया रोग होता है।  रक्त के जिंस में बदलाव के कारण खून का एक आवश्यक भाग "लाल रक्त कण" RBC नहीं बन पाते। यदि थोड़े बहुत बनते भी हैं तो वे लंबे समय तक जिंदा नहीं रह पाते। जिससे इससे पीड़ित बच्चे को खून चढ़ाने की जरूरत होती है। यदि रोगी को कोई बाहरी चोट लगने से रक्तस्राव होने लगता है तो रक्त लगातार बहता रहता है क्योंकि इस रोग में खून का थक्का नहीं जम पाता। ऐसे बच्चों को आइरन की गोलियां और बार-बार खून चढ़ाना यही एकमात्र उपचार दिया जाता है। लेकिन बार-बार खून चढ़ाने,आइरन की गोलियां देने से रोगी के खून में लौह तत्व की अधिकता हो जाती है। कुछ वर्षों के बाद लिवर,स्प्लीन व ह्रदय की धमनियों में लौह तत्व जमा होने से ये अपना काम सही तौर पर नहीं कर पाते।

थैलेसीमिया से बचाव के उपाय - 

चूंकि इस रोग का कोई इलाज नहीं है अतः रोग से बचाव हेतु सावधानी रखना ही एकमात्र उपाय है। यदि हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे इस बीमारी से दूर रहें तो विवाह के पहले लड़का व लड़की की स्वास्थ्य कुंडली या हैल्थ कुंडली मिलान जरूरी है।

 क्या है स्वास्थ्य कुंडली - 

स्वास्थ्य कुंडली में महिला तथा पुरूष दोनों के रक्त की जांच की जाती है। इसमें थैलेसीमिया, एड्स, हैपेटाइटिस-बी और सी, आरएच फैक्टर से संबंधित जांच की जाती है। इस प्रकार की जांच नाममात्र के शुल्क पर और कई सामाजिक संस्थायें तो बिल्कुल निःशुल्क भी करती हैं।

Thursday, April 29, 2021

विश्व नृत्य दिवस 29 अप्रेल

 


29 अप्रेल - विश्व नृत्य दिवस

इस दिन की शुरुआत यूनेस्को की कला संस्थान की सहयोगी संस्था "अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्था" की इकाई नृत्य समिति द्वारा की गई है। महान नृतक जीन नवेरे  की याद में प्रति वर्ष 29 अप्रेल को अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस मनाने की शुरुआत सन् 1982 में की गई थी।नवेरे फ्रांसीसी नर्तक थे और बेले डांस में पारंगत थे।

गीत-संगीत दुनिया के हर कोने में रहने वाले मनुष्य की जीवनशैली का एक अभिन्न अंग है। संगीत व नृत्य जीवन में उमंग, उल्लास और आनंद भर देता है। नृत्यमन में उत्साह और आत्मविश्वास पैदा करता है। विविध नृत्य मुद्राओं से शरीर के प्रत्येक हिस्से की कसरत हो जाती है और शरीर में लचीलापन व  रक्त संचार बेहतर होता है। मतलब नृत्य मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए एक टॉनिक की तरह है। नृत्य करते समय एकाग्रता बहुत जरूरी है इसलिए नृत्य से एकाग्र क्षमता भी बढ़ती है। 

भारतीय संस्कृति में नृत्य व संगीत का बहुत महत्व है। भारत में नृत्य की अनगिनत शैलियां है। जनजातीय और लोकनृत्य से लेकर शास्त्रीय नृत्यकला की परंपरा से भारतीय संस्कृति की समृद्धि मन को अभिभूत कर देती है। भरत नाट्यम से शरीर के पॉश्चर में निखार आता है। इस नृत्य शैली में आंखों के मूवमेंट का खास महत्व है इसलिए यह नृत्य आंखों के व्यायाम के लिए उत्तम है। 

जुम्बा डांस को तो एक्सरसाइज में गिना जाता है। जुम्बा डांस से फेफड़े सुदृढ़ बनते हैं और मोटापा, थाइरोइड, व हृदय रोग में भी लाभ होता है।

आपको यह भी बता दें कि सन् 2024 में पेरिस में ओलिम्पिक खेल होने जा रहे हैं,उसमें ब्रेक डांस को एक खेल के रूप में पहली बार शामिल किया जायेगा। ब्रेक डांस हिप-हॉप डांस का ही हिस्सा है। ब्रेक डांस में चार बेसिक स्टेप्स होते हैं।

1. टॉप रॉक - सीधे खड़े होकर स्टेप्स करना

2. डाउन रॉक - हाथ व पैरों से डाउन स्टेप्स करना। इसे फ्लोरवर्क यानि फुटवर्क कहते हैं।

3. फ्रिजेस - डांस करते हुए किसी एक स्थिति में फ्रिज हो जाना।

4. पॉवर - हेड स्पिन, हैंड स्पिन, विंड मिल जैसे मूव करना।

नृत्य करने व इसे सीखने में दिलचस्पी रखने वालों को  सबसे पहले कोई एक गुरु अवश्य बनाना चाहिए। नृत्य सिखाने वाले गुरु को फिल्म इंडस्ट्री में "कोरियोग्राफर" कहा जाता है। 

तमिल फिल्म इंडस्ट्री के मशहुर डांसर और कोरियोग्राफर प्रभु देवा को भारत का "माइकल जैक्सन" कहा जाता है।

कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि नृत्य का हमारे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मानसिक तनाव,उदासी और अवसाद जैसी बीमारियां दूर होती हैं। इसीलिए जंगलों में रहने वाली जनजाति के लोग नृत्य कलाओं से उत्साह पूर्ण व स्वस्थ-सुखी लंबा जीवन जीते हैं।

Friday, April 23, 2021

अप्रेल माह के महत्वपूर्ण दिन

 


1 अप्रेल - मूर्ख दिवस

मित्रों, परिचितों और रिश्तेदारों के मध्य प्रेम-भाव बना रहे और हंसी- मजाक के द्वारा रिश्तों को और प्रगाढ़ बनाया जाए इसलिए साल में एक दिन अर्थात 1 अप्रेल को पूरी दुनिया में मूर्ख दिवस मनाया जाता है।

इस दिन सभी लोग अपने जान-पहचान वाले, रिश्तेदारों व सहकर्मियों के साथ शरारत करते हैं और झूठी अफवाह फैला कर बेवकूफ बनाते हैं। शरारतें हालांकि इस तरह की नहीं होती हैं कि किसीको कोई नुकसान हो।

1 अप्रेल के दिन लोग सुबह से ही कुछ ज्यादा ही सतर्क हो जाते हैं। इस दिन कोई भी किसी की बात का भरोसा नहीं करता और हर बात को मजाक समझता है।

1 अप्रेल को "आल फूल्स डे" भी कहा जाता है। यद्यपि यह पश्चिमी देशों द्वारा दुनिया में फैला है लेकिन इसी तरह का उत्सव भारत में "होली" के दिन मनाया जाता है।


05 अप्रेल - राष्ट्रीय समुद्र दिवस National Maritime Day

भारत में 5 अप्रेल को राष्ट्रीय समुद्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन पहला भारतीय समुद्री जहाज मुम्बई से ब्रिटेन के लिए रवाना किया गया था। यह दिन समुद्री रास्ते से अंतर महाद्वीपीय और वैश्विक व्यापार-व्यवसाय को बढ़ावा देने और देश की अर्थव्यवस्था में जल-परिवहन की महत्ता  बताने के लिए मनाया जाता है ताकि जन-साधारण भारतीय जहाजरानी उद्योग की गतिविधियों और अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका से अवगत हो सके।

विश्व समुद दिवस हर साल सितंबर माह के अंतिम गुरुवार को मनाया जाता है।


07 अप्रेल - बिश्व स्वास्थ्य दिवस -

आज ही के दिन सन् 1948 में विश्व स्वास्थ्य संगठन World Health Organisation यानि WHO का गठन किया गया था। WHO की स्थापना का उद्देश्य  संसार भर में लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर रिपोर्ट तैयार करके उसका हल निकालना है। दुनिया से चेचक, पोलियो, जैसी बीमारियों को समाप्त करने में WHO ने बहुत प्रयास किए।


10 अप्रेल - विश्व होम्योपैथी दिवस - 

हर साल विश्व में 10 अप्रेल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के जनक माने जाने वाले जर्मनी के फ्रेडरिक सेमुअल हैनिमैन का जन्म 10 अप्रेल को ही हुआ था। विश्व होम्योपैथी दिवस केवल डॉ हैनिमैन की जयंती के उपलक्ष्य में ही नहीं मनाया जाता है बल्कि होम्योपैथी चिकित्सा को आगे बढ़ाने में आने वाली चुनौतियों और भविष्य की चिकित्सा रणनीति तय करने के लिए भी मनाया जाता है।

होम्योपैथी दिवस मनाये जाने का मुख्य उद्देश्य, चिकित्सा की इस पद्धति के बारे में जागरूकता पैदा करना तो है ही, साथ ही इसको आसानी से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना भी है। ताकि सामान्य लोग भी इसका लाभ प्राप्त कर सके।

आज विश्व भर में करीब 100 देशों में रोगियों का इलाज होम्योपैथी द्वारा किया जा रहा है। होम्योपैथी जहां कोई नुकसान नहीं करती, वहीं इसकी दवाओं की कीमत ज्यादा नहीं होती है। होम्योपैथी से जटिल से जटिल रोग का इलाज करके उसे जड़ से खत्म किया जा सकता है। प्रति वर्ष 10 अप्रेल को होम्योपैथी दिवस पर कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।


10 अप्रेल - सिंधी भाषा दिवस-

भारत ही नहींबल्कि संसार के हर कोने में बसे सिंधियों के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन है।आज के दिन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 8वें के उस संसोधन विधेयक पर राष्ट्रपति डॉ एस राधाकृष्ण ने हस्ताक्षर किए थे जिससे देश की 14 राजकीय भाषाओं के साथ 15वीं भाषा के रूप में सिंधी भाषा को स्थान मिला। यह सभी सिंधी भारतीयों के लिए गौरव और सम्मान का अवसर था। परंतु यह सम्मान दिलाने के लिए एक अद्वितीय जिजीविषा के धनी सन् 1946 म् गठित संविधान सभा के सम्मानीय सदस्य श्री जयराम दौलतराम थे।जयरामजी का जन्म कराची में 21 जुलाई 1891 में हुआ था।

श्री जयराम ने यह दृढ़ निश्चय कर लिया था कि सिंधी भाषा कोपन भी अन्य 14 भाषाओं की तरह संविधान में आधिकारिक भाषा का दर्जा दिला कर मानेंगे। उनके इस प्रस्ताव का तब के शिक्षा मंत्री मोहम्मद करीम छागला ने खारिज कर दिया और कहा कि सिन्धप्रदेश भारत में नहीं बल्कि पाकिस्तान में है इसलिए सिंधी भाषा को देश की आधिकारिक भाषा नहीं मान सकते। जयराम जी ने अपनी कोशिश जारी रखते हुए तर्क दिया कि सिंध प्रांत भारत मे नहीं है लेकिन सिंधी भाषा प्रयोग करने वाले काफी लोग देश मे है जिनका देश की स्वतंत्रता व समृद्धि में योगदान को आदर मिलना चाहिए। उन्होंने तत्कालीन गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा को लंबी बहस से सहमत कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने मंत्रिमंडल के 12 प्रमुख सदस्यों को भी सिंधी भाषा के महत्व से परिचित कराया। 

27 अक्टूबर 1966 को मंत्रिमंडल ने सिंधी भाषा को संविधान में शामिल करना स्वीकार कर लिया। 9 दिसंबर 1966 को इससे संबंधित विधेयक राज्य सभा मे रखा गया जो सभी दलों की सहमति से पास हो गया। यहां यह बताना जरूरी है कि उस समय राज्यसभा में जनसंघ के नेता अटल बिहारी वाजपेयी थे। जिन्होंने जयरामजी से भी पहले सिंधी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने हेतु एक अशासकीय विधेयक पेश किया था। उन्होंने एक वक्तव्य दिया कि यह विधेयक मैंने प्रस्तुत किया है लेकिन इसका श्रेय श्री जयरामजी को मिलना चाहिए। सन् 1966 में आम चुनाव होने वाले थे। इसलिए लोकसभा में भेजे जाने वाले सभी विधेयक अटक गए। चुनावों के बाद यह विधेयक 4 अप्रेल 1967 को पुनः राज्यसभा में प्रस्तुत हुआ और चेती चांद10 अप्रेल के दिन यह विधेयक पास हुआ।

सिंधी भाषा बोलने में संस्कृत और गुजराती भाषा से बहुत मिलती है। लिखने में यह अरबी लिपि की तरह है।



11 अप्रेल - सुरक्षित मातृत्व दिवस - 

गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के बेहतर स्वास्थ्य हेतु जन साधारण को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 11 अप्रेल को सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है। महात्मा गांधीजी की पत्नी कस्तूरबा गांधी की जयंती के दिन उनकी याद में यह दिन मनाया जाता है।

भारत विश्व का पहला ऐसा देश है जिसने 11 अप्रेल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाने की शुरुआत की। वैश्विक संस्था  "व्हाइट रिबन अलायंस फॉर सेफ मदरहुड" नामक संगठन के द्वारा भारत में किये गए सर्वे के बाद केंद सरकार ने संस्था के आग्रह पर कस्तूरबा गांधी की जयंती पर  सुरक्षित मातृत्व दिवस का आरंभ किया।

गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं की देखभाल, उनके पौषक आहार व प्रसव संबंधित सावधानियों के बारे में जागरूकता फैलाने हेतु हर वर्ष कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। 

मौजूदा NDA सरकार ने प्रसव के दौरान महिलाओं की होने वाली मृत्यु की बढ़ती दर पर ध्यान केंद्रित किया व इसे न्यूनतम करने हेतु बहुत सी योजनायें बनाई। PMSMA प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान इनमे प्रमुख है जिसकी शुरुआत 2016 में की गई थी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन संचालित होने वाली इस योजना का मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नीचे लाना है। और योजना अपने उद्देश्य में काफी हद तक सफल भी हो रही है। गम्भीर बीमारियों से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं को प्रसव के दौरान और उसके उपरांत होने वाली मृत्यु से बचाने में भी यह योजना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

31 दिसंबर 2016 को एक अन्य योजना "गर्भावस्था सहायता योजना केंद्र द्वारा शुरू की गई। जिसमें प्रसव पश्चात महिलाओं को 6000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

केंद्र सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए मातृ अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ा कर 26 सप्ताह कर दिया है जिससे संगठित क्षेत्र में कार्य करने लगभग 18 लाख महिलाओं को इससे लाभ होगा। जच्चा-बच्चा  के स्वास्थ्य की देखरेख और नवजात शिशु को माता का भरपूर स्नेह मिले, मातृ अवकाश में बढ़ोतरी करने का मुख्य उद्देश्य है। जिस कंपनी या कारखाने में 50 या इससे अधिक कर्मचारी काम करते हों, वहां एक क्रेच यानि झूलाघर होना भी आवश्यक है।

सरकार के इन प्रयासों से हाल के वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकेतकों में देश ने पर्याप्त सुधार किया है। नव शिशु मृत्यु दर( IMR ), मातृ मृत्यु दर ( MMR ), कुल प्रजनन दर (TFR)  पिछले सालों की तुलना में उल्लेखनीय प्रगति की है।


17 अप्रेल - विश्व हीमोफीलिया दिवस

हीमोफीलिया नामक बीमारी मानव रक्त से संबंधित एक बीमारी है जिसमें रक्त का थक्का बनना बन्द हो जाता है और चोट लगने या किसी और कारण से शरीर से रक्त बहना शुरू होने के बाद बन्द नहीं होता और रोगग्रस्त व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए यह दिन मनाया जाता है।


18 अप्रेल - विश्व धरोहर दिवस

पूरी दुनिया हर वर्ष 18 अप्रेल को विश्व धरोहर दिवस मनाती है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य विश्व में नाम मात्र के बचे मानव सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक व सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति जागरूकता लाना है।


22 अप्रेल - विश्व पृथ्वी दिवस 

प्रति वर्ष 22 अप्रेल को विश्व पृथ्वी दिवस  यानि "अर्थ डे" मनाया जाता है। सन् 1970 में आज ही के दिन सबसे पहली बार पृथ्वी दिवस मनाया गया। लोगों को बिगड़ते पर्यावरण के कारणों के बारे में लोगों को आगाह करने और इसके संरक्षण हेतु प्रेरित करने के लिए यह दिन मनाया जाता है। अमेरिका में इसे "ट्री डे'" की तरह मनाया जाता है।


23 अप्रेल - विश्व पुस्तक दिवस

पुस्तकें हमारी पथ-प्रदर्शक बन कर हमें ज्ञान के संसार मे ले जाती हैं,साथ ही ये अकेलेपन के समय एक दोस्त की तरह आदमी का साथ देती है। पुस्तक दिवस मनाने का कारण यही है कि लोगों में किताबें पढ़ने की आदत को बढ़ाया जाए। खाली समय में पुस्तकें मनोरंजन के साथ-साथ नई जानकारीयां पाने का तरीका भी है।

24 अप्रेल - पंचायती राज दिवस

प्रति वर्ष 24 अप्रेल को देश भर में पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। 24 अप्रेल भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम 1992 के पारित होने के लिए जाना जाता है। सन् 1992 में भारतीय संविधान में 73वां संशोधन करके पंचायती राज की संकल्पना को साकार किया गया। जिसके पश्चात 24 अप्रेल 1994 से यह अधिनियम लागू हुआ।


25 अप्रेल - विश्व मलेरिया दिवस

इस दिन लोगों को मलेरिया से बचने के उपाय, मच्छरों की उत्पत्ति रोकने के उपाय,मच्छरों के काटने से बचने के उपाय, मच्छरों से होने वाली बीमारियों के लक्षणों को पहचानने, उसकी जांच आरडीटी किट द्वारा करना व मलेरिया होने पर उचित इलाज लेना आदि जानकारी दी जाती है।

26 अप्रेल - विश्व बौद्धिक संपदा दिवस

26 अप्रेल का दिन विश्व बौद्धिक संपदा संस्थान के नेतृत्व में पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बौद्धिक संपदा के अधिकारों  जैसे पेटेंट, ट्रेडमार्क, इंडस्ट्रियल डिजाइन, कॉपीराइट आदि के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है।


29 अप्रेल - विश्व नृत्य दिवस

इस दिन की शुरुआत यूनेस्को की कला संस्थान की सहयोगी संस्था "अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्था" की इकाई नृत्य समिति द्वारा की गई है। महान नृतक जीन नवेरे  की याद में प्रति वर्ष 29 अप्रेल को अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस मनाने की शुरुआत सन् 1982 में की गई थी।नवेरे फ्रांसीसी नर्तक थे और बेले डांस में पारंगत थे।

गीत-संगीत दुनिया के हर कोने में रहने वाले मनुष्य की जीवनशैली का एक अभिन्न अंग है। संगीत व नृत्य जीवन में उमंग, उल्लास और आनंद भर देता है। नृत्यमन में उत्साह और आत्मविश्वास पैदा करता है। विविध नृत्य मुद्राओं से शरीर के प्रत्येक हिस्से की कसरत हो जाती है और शरीर में लचीलापन व  रक्त संचार बेहतर होता है। मतलब नृत्य मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए एक टॉनिक की तरह है। नृत्य करते समय एकाग्रता बहुत जरूरी है इसलिए नृत्य से एकाग्र क्षमता भी बढ़ती है। 

भारत में नृत्य की अनगिनत शैलियां है। जनजातीय और लोकनृत्य से लेकर शास्त्रीय नृत्यकला की परंपरा से भारतीय संस्कृति की समृद्धि मन को अभिभूत कर देती है। भरत नाट्यम से शरीर के पॉश्चर में निखार आता है। इस नृत्य शैली में आंखों के मूवमेंट का खास महत्व है इसलिए यह नृत्य आंखों के व्यायाम के लिए उत्तम है। 

जुम्बा डांस को तो एक्सरसाइज में गिना जाता है। जुम्बा डांस से फेफड़े सुदृढ़ बनते हैं और मोटापा, थाइरोइड, व हृदय रोग में भी लाभ होता है।

आपको यह भी बता दें कि सन् 2024 में पेरिस में ओलिम्पिक खेल होने जा रहे हैं,उसमें ब्रेक डांस को एक खेल के रूप में पहली बार शामिल किया जायेगा। ब्रेक डांस हिप-हॉप डांस का ही हिस्सा है। ब्रेक डांस में चार बेसिक स्टेप्स होते हैं।

1. टॉप रॉक - सीधे खड़े होकर स्टेप्स करना

2. डाउन रॉक - हाथ व पैरों से डाउन स्टेप्स करना। इसे फ्लोरवर्क यानि फुटवर्क कहते हैं।

3. फ्रिजेस - डांस करते हुए किसी एक स्थिति में फ्रिज हो जाना।

4. पॉवर - हेड स्पिन, हैंड स्पिन, विंड मिल जैसे मूव करना।

कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि नृत्य का हमारे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मानसिक तनाव,उदासी और अवसाद जैसी बीमारियां दूर होती हैं। इसीलिए जंगलों में रहने वाली जनजाति के लोग नृत्य कलाओं से उत्साह पूर्ण व स्वस्थ-सुखी लंबा जीवन जीते हैं।


30 अप्रेल - आयुष्मान भारत दिवस

ग्राम स्वराज अभियान के तहत आयुष्मान भारत दिवस 30 अप्रेल को सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है।आयुष्मान भारत दिवस सर्वप्रथम 30 अप्रेल 2018 को मनाया गया था। देश भर में आज के दिन नागरिकों को केंद सरकार की स्वास्थ्य संबंधित जितनी भी योजनायें हैं, उनके बारे में बताया जाता है।






Thursday, April 22, 2021

विश्व लिवर दिवस 19 अप्रेल


 विश्व लिवर दिवस 19 अप्रेल को मनाया जाता है। इस दिन  को मनाने का उद्देश्य लिवर अर्थात यकृत से जुड़ी बीमारियों के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जानकारी देना, उन्हें इन बीमारियों से बचाव हेतु जागरूक करना है।

लिवर को यकृत और आम भाषा में जिगर या कलेजा भी कहा जाता है। यूँ तो हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग त्वचा है पर मानव शरीर के भीतरी अंगों में सबसे बड़ा अंग कोई है तो वह है- यकृत। यकृत की संरचना मस्तिष्क की तरह ही बेहद जटिल है। मनुष्य में हृदय शरीर के बाईं ओर स्थित होता है वहीं लिवर शरीर के दाहिनी तरफ डायफ्राम के नीचे होता है।

WHO विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में लिवर की बीमारियों से होने वाली मौतों का आंकड़ा काफी बड़ा है। उसमें भी चिंता की बात यह है कि युवाओं में लिवर की बीमारी तेजी से फैलती जा रही है।

यकृत हमारे पाचन तंत्र का एक प्रमुख हिस्सा है। हम सभी जो भी आहार मुंह के जरिये ग्रहण करते हैं वह सब इस लिवर से होकर गुजरता है। लिवर पित्त अर्थात बाइल जूस का स्त्राव करता है जो भोजन को पचाने में सहायक होता है।यह अतिरिक्त शर्करा (ग्लूकोज) को glycogen में बदलकर संग्रहित करता है।

स्वस्थ लिवर तो स्वस्थ तन - 

30 वर्ष व इससे अधिक उम्र के लोगों को लिवर का खास ध्यान रखना जरूरी है, विशेषकर उनको जिनका बीएमआई * 25 से ज्यादा है। 45 वर्ष की आयु के बाद समय-समय पर खून की जांच, NAFLD*, और लिवर फंक्शन टेस्ट कराते रहना चाहिए जिससे फैटी लिवर डिसीज़ का सही समय पर पता चल सके। तले खाद्य पदार्थ, ज्यादा नमक-मिर्च आदि का सेवन कम करके, धूम्रपान, शराब बन्द करके, वजन कंट्रोल करके आप NAFLD* से अपना बचाव कर सकते हैं।

लिवर को पसंद है यह भोजन - 

पत्तेदार सब्जियां, लहसुन, सेवफल और अखरोट खाएं। ज्यादा नमक-मिर्च व तेल-घी, चावल, आलू आदि लिवर के लिए घातक है। शराब और सिगरेट तो लिवर के दुश्मन है हीं। फास्ट फूड भी आजकल कम उम्र के लोगों में लिवर कमजोर होने का बड़ा कारण बनता जा रहा है। इनमें मिला हुआ सोडियम,पोटेशियम लिवर को नष्ट करने में सबसे आगे रहते हैं।

बीएमआई * - बीएमआई (BMI) यानी बॉडी मास इंडेक्स, ये बताता है कि आपके शरीर का वजन आपकी हाईट यानी लंबाई के अनुसार ठीक है या नहीं। एक तरह से इसे आपके शरीर की लंबाई और वजन का अनुपात कहा जा सकता है। एक सामान्य शरीर की बीएमआई 22.1 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

NAFLD* - नॉन एल्कोहलिक फैटी लीवर डिज़ीज (Non-Alcoholic Fatty liver disease or NAFLD)-उच्च वसायुक्त भोजन एवं अनुचित जीवनशैली के कारण व्यक्ति में मोटापे एवं डायबिटीज की समस्या होने लगती है जो कि फैटी लीवर होने में बड़े कारण है। शराब न लेने पर भी इन स्थितियों में फैटी लीवर होने की पूरी संभावना है।

लीवर ट्रांसप्लांट - 

कई बार मरीज का लीवर बिल्कुल खराब हो चुका होता है। ऐसी स्थिति में नया लीवर ट्रांसप्लांट करने की जरूरत होती है। लीवर ट्रांसप्लांट के बाद मरीज बिल्कुल स्वस्थ हो जाता है। यहां यह बात बहुत महत्व रखती है कि लीवर डोनर लीवर देने के बाद भी पहले की तरह सामान्य जीवन जिता है। लीवर मानव शरीर का ऐसा अंग है जिसका पुनःनिर्माण हो जाता है। कोई भी स्वस्थ व्यक्ति 50% लीवर दान कर सकता है।

Monday, April 12, 2021

11 अप्रेल - सुरक्षित मातृत्व दिवस


 11 अप्रेल - सुरक्षित मातृत्व दिवस - 

गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के बेहतर स्वास्थ्य हेतु जन साधारण को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 11 अप्रेल को सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है। महात्मा गांधीजी की पत्नी कस्तूरबा गांधी की जयंती के दिन उनकी याद में यह दिन मनाया जाता है।

भारत विश्व का पहला ऐसा देश है जिसने 11 अप्रेल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाने की शुरुआत की। वैश्विक संस्था  "व्हाइट रिबन अलायंस फॉर सेफ मदरहुड" नामक संगठन के द्वारा भारत में किये गए सर्वे के बाद केंद सरकार ने संस्था की पहल पर कस्तूरबा गांधी की जयंती पर  सुरक्षित मातृत्व दिवस का आरंभ किया।

गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं की देखभाल, उनके पौषक आहार व प्रसव संबंधित सावधानियों के बारे में जागरूकता फैलाने हेतु हर वर्ष कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। 

मौजूदा NDA सरकार ने प्रसव के दौरान महिलाओं की होने वाली मृत्यु की बढ़ती दर पर ध्यान केंद्रित किया व इसे न्यूनतम करने हेतु बहुत सी योजनायें बनाई। PMSMA प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान इनमे प्रमुख है जिसकी शुरुआत 2016 में की गई थी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन संचालित होने वाली इस योजना का मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नीचे लाना है। और योजना अपने उद्देश्य में काफी हद तक सफल भी हो रही है। गम्भीर बीमारियों से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं को प्रसव के दौरान और उसके उपरांत होने वाली मृत्यु से बचाने में भी यह योजना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

31 दिसंबर 2016 को एक अन्य योजना "गर्भावस्था सहायता योजना केंद्र द्वारा शुरू की गई। जिसमें प्रसव पश्चात महिलाओं को 6000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

केंद्र सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए मातृ अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ा कर 26 सप्ताह कर दिया है जिससे संगठित क्षेत्र में कार्य करने लगभग 18 लाख महिलाओं को इससे लाभ होगा। जच्चा-बच्चा  के स्वास्थ्य की देखरेख और नवजात शिशु को माता का भरपूर स्नेह मिले, मातृ अवकाश में बढ़ोतरी करने का मुख्य उद्देश्य है। जिस कंपनी या कारखाने में 50 या इससे अधिक कर्मचारी काम करते हों, वहां एक क्रेच यानि झूलाघर होना भी आवश्यक है।

सरकार के इन प्रयासों से हाल के वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकेतकों में देश ने पर्याप्त सुधार किया है। नव शिशु मृत्यु दर( IMR ), मातृ मृत्यु दर ( MMR ), कुल प्रजनन दर (TFR)  पिछले सालों की तुलना में उल्लेखनीय प्रगति की है।


Sunday, April 11, 2021

10 अप्रेल - विश्व होम्योपैथी दिवस


 10 अप्रेल - विश्व होम्योपैथी दिवस - 

हर साल विश्व में 10 अप्रेल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के जनक माने जाने वाले जर्मनी के फ्रेडरिक सेमुअल हैनिमैन का जन्म 10 अप्रेल को ही हुआ था। विश्व होम्योपैथी दिवस केवल डॉ हैनिमैन की जयंती के उपलक्ष्य में ही नहीं मनाया जाता है बल्कि होम्योपैथी चिकित्सा को आगे बढ़ाने में आने वाली चुनौतियों और भविष्य की चिकित्सा रणनीति तय करने के लिए भी मनाया जाता है।

होम्योपैथी दिवस मनाये जाने का मुख्य उद्देश्य, चिकित्सा की इस पद्धति के बारे में जागरूकता पैदा करना तो है ही, साथ ही इसको आसानी से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना भी है। ताकि सामान्य लोग भी इसका लाभ प्राप्त कर सके।

आज विश्व भर में करीब 100 देशों में रोगियों का इलाज होम्योपैथी द्वारा किया जा रहा है। होम्योपैथी जहां कोई नुकसान नहीं करती, वहीं इसकी दवाओं की कीमत ज्यादा नहीं होती है। होम्योपैथी से जटिल से जटिल रोग का इलाज करके उसे जड़ से खत्म किया जा सकता है। प्रति वर्ष 10 अप्रेल को होम्योपैथी दिवस पर कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।


10 अप्रेल - सिंधी भाषा दिवस


 10 अप्रेल - सिंधी भाषा दिवस-

भारत ही नहींबल्कि संसार के हर कोने में बसे सिंधियों के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन है। आज के दिन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 8वें के उस संसोधन विधेयक पर राष्ट्रपति डॉ एस राधाकृष्ण ने हस्ताक्षर किए थे जिससे देश की 14 राजकीय भाषाओं के साथ 15वीं भाषा के रूप में सिंधी भाषा को स्थान मिला। यह सभी सिंधी भारतीयों के लिए गौरव और सम्मान का अवसर था। परंतु यह सम्मान दिलाने के लिए एक अद्वितीय जिजीविषा के धनी सन् 1946 म् गठित संविधान सभा के सम्मानीय सदस्य श्री जयराम दौलतराम थे। जयरामजी का जन्म कराची में 21 जुलाई 1891 में हुआ था।


श्री जयराम ने यह दृढ़ निश्चय कर लिया था कि सिंधी भाषा को भी अन्य 14 भाषाओं की तरह संविधान में आधिकारिक भाषा का दर्जा दिला कर मानेंगे। उनके इस प्रस्ताव का तब के शिक्षा मंत्री मोहम्मद करीम छागला ने खारिज कर दिया और कहा कि सिन्धप्रदेश भारत में नहीं बल्कि पाकिस्तान में है इसलिए सिंधी भाषा को देश की आधिकारिक भाषा नहीं मान सकते। जयराम जी ने अपनी कोशिश जारी रखते हुए तर्क दिया कि सिंध प्रांत भारत मे नहीं है लेकिन सिंधी भाषा प्रयोग करने वाले काफी लोग देश मे है जिनका देश की स्वतंत्रता व समृद्धि में योगदान को आदर मिलना चाहिए। उन्होंने तत्कालीन गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा को लंबी बहस से सहमत कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने मंत्रिमंडल के 12 प्रमुख सदस्यों को भी सिंधी भाषा के महत्व से परिचित कराया। 

27 अक्टूबर 1966 को मंत्रिमंडल ने सिंधी भाषा को संविधान में शामिल करना स्वीकार कर लिया। 9 दिसंबर 1966 को इससे संबंधित विधेयक राज्य सभा मे रखा गया जो सभी दलों की सहमति से पास हो गया। यहां यह बताना जरूरी है कि उस समय राज्यसभा में जनसंघ के नेता अटल बिहारी वाजपेयी थे। जिन्होंने जयरामजी से भी पहले सिंधी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने हेतु एक अशासकीय विधेयक पेश किया था। उन्होंने एक वक्तव्य दिया कि यह विधेयक मैंने प्रस्तुत किया है लेकिन इसका श्रेय श्री जयरामजी को मिलना चाहिए। सन् 1966 में आम चुनाव होने वाले थे। इसलिए लोकसभा में भेजे जाने वाले सभी विधेयक अटक गए। चुनावों के बाद यह विधेयक 4 अप्रेल 1967 को पुनः राज्यसभा में प्रस्तुत हुआ और चेती चांद10 अप्रेल के दिन यह विधेयक पास हुआ।

सिंधी भाषा बोलने में संस्कृत और गुजराती भाषा से बहुत मिलती है। लिखने में यह अरबी लिपि की तरह है।

( संदर्भ: आजाद नायक अंक- 11अप्रेल 2021 )

Thursday, March 25, 2021

मार्च माह के महत्वपूर्ण दिन

 1 मार्च - विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस

विश्व भर में नागरिकों को अपनी जान की रक्षा करने के प्रति प्रोत्साहित करने व दुर्घटनाओं से सचेत रहने के लिए 1 मार्च को विश्व नागरिक दिवस मनाया जाता है। इस दिन आपदाओं से लड़ने के प्रयासों में बलिदान देने वालों को श्रद्धांजलि दी जाती है। सन् 1990 में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संगठन महासभा द्वारा यह दिन मनाने की शुरुआत की गई थी।


3 मार्च - विश्व वन्यजीव दिवस

इस दिन दुनिया भर में वन्यजीवों के संरक्षण हेतु कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। हर साल अलग-अलग थीम के माध्यम से जनता को प्रकृति से विलुप्त होती जा रही वन्य जीवों व वनस्पतियों का संरक्षण करने हेतु जागृत किया जाता है।


4 मार्च - राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस 

नागरिकों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रति वर्ष 4 मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा सन् 1972 में इस तरह के अभियान का आरंभ किया गया था। इस दिन को मनाने का उद्देश्य देश के नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य व पर्यावरण संबंधित सहायता सेवा का लाभ पहुंचाना है।


8 मार्च - अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

महिलाओं के प्रति सम्मान और उनका आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र में योगदान देने को स्मरणीय बनाने के लिए हर वर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

 महिला दिवस सबसे पहली बार 28 फरवरी 1909 को अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर मनाया गया। उस समय इसका उद्देश्य महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलाया जाना था क्योंकि तब महिलाएं वोट नहीं दे सकती थीं।

महिला दिवस की तारीख को सन् 1921 में 8 मार्च किया गया। महिला दिवस पर विश्व भर में महिलाओं की विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने हेतु कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं व समाज की महिलाओं का सम्मान किया जाता है।


15 मार्च - विश्व उपभोक्ता दिवस

उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देने के उद्देश्य से पूरे विश्व में उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है।


16 मार्च - राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस

बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी टीकाकरण के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने हेतु भारत सरकार हर वर्ष 16 मार्च को देश में टीकाकरण दिवस मनाती है। सन् 1995 में देश में पोलियो की ओरल वेक्सीन की पहली खुराक दी गई थी। तब से भारत बराबर पोलियो को देश से समाप्त करने के लिए प्रयास करती आ रही है। 

  19 मार्च - विश्व निद्रा दिवस 

अच्छी नींद सभी प्राणियों के जीवन का आधारभूत हिस्सा है। नींद बेहतर जिंदगी के लिए जरूरी है। नींद में कमी से न शारिरिक दुर्बलता आती है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। 

21 मार्च - विश्व वन दिवस

वनों की महत्ता सर्व विदित है। वनों के कारण ही बदलते जलवायु परिवर्तन पर काबू किया जा सकता है। वनों की उपयोगिता और उनकी आवश्यकता के बारे में आम लोगों को बताने हेतु  दुनिया भर में विभिन्न कार्यक्रम किये जाते हैं।

27 मार्च - विश्व रंगमंच दिवस

रंगमंच व रंगकर्मियों को समर्पित यह दिवस पूरी दुनिया में रंगमंच के माध्यम से समाज को जागरूक करने की कोशिश करने में लगे कलाकारों के काम को सराहने के लिए मनाया जाता है। प्रति वर्ष दुनिया के कोई एक प्रसिद्ध रंगकर्मी द्वारा  विश्व को आधिकारिक संदेश दिया जाता है। सन् 2002 में भारत के सुप्रसिद्ध रंगकर्मी और फ़िल्म अभिनेता गिरीश कर्नाड द्वारा दुनिया को अपना संदेश देने का अवसर मिला था।





Friday, March 5, 2021

फरवरी माह के महत्वपूर्ण दिन

 1 फरवरी - तटरक्षक दिवस

इस दिन 1 फरवरी 1977 को भारतीय तटरक्षक की स्थापना की गई थी।

4 फरवरी - कैंसर दिवस -

लोगों को कैंसर नामक घातक बीमारी के बारे में जागरूक करना, बीमारी से लड़ने के लिए प्रेरित करना, रोग ग्रस्त लोगों का इलाज करना आदि उद्धेश्य को ध्यान में रखते हुए यह दिन मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में कैंसर से सम्बंधित कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

28 फरवरी - राष्ट्रीय विज्ञान दिवस - 

आम नागरिकों को विज्ञान का महत्व बताने एवं इसमें बच्चों और युवा वर्ग की रुचि बढ़ाने हेतु राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा प्रति वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इस दिन भारत के महान भौतिक विज्ञानी डॉ चंद्रशेखर वैंकट रमन का जन्म हुआ था। डॉ रमन ने रमन प्रभाव की खोज की थी जिसके लिए उन्हें सन् 1930 में भौतिक शास्त्र का नोबल पुरस्कार दिया गया था।