Friday, August 26, 2022

महिला समानता दिवस

 


समाज का विकास तभी संभव है जब महिलाओं को समान मानवता के अधिकार मिले। जैसे महिलाएं अपने पूरे घर-परिवार की अच्छे से परवरिश करती हैं, वैसे ही देश के निर्माण और अच्छे विकास के लिए महिलाओं का आगे आना आवश्यक है। परंतु आज भी ऐसे कई देश हैं जहां पर महिलाओं को एक सम्मान अधिकार नहीं मिले हैं। अपने सम्मान अधिकारों के लिए वह आज भी लड़ रही हैं। उनके सम्मान अधिकारों को मान्यता देने के लिए हर साल 26 अगस्त यानी की आज के दिन महिला समानता दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के लिए एक थीम भी रखी जाती है। तो चलिए आपको बताते हैं कि कैसे इस दिन की शुरुआत हुई थी। का इतिहास 

महिला समानता दिवस की लड़ाई अमेरिका में शुरु हुई थी।


महिला समानता दिवस का इतिहास-


 अमेरिका में 1853 में महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए लड़ना शुरु किया था। इस लड़ाई में उन्होंने शादी के बाद संपत्ति पर अपने अधिकारों की मांग रखी थी। ऐसा माना जाता है  कि उस समय अमेरिका के साथ कई सारे पश्चिमी देशों में महिलाओं को बहुत ही कम अधिकार दिए जाते थे। उनके साथ पुरुषों के गुलामों की तरह बर्ताव किया जाता था। उनकी लड़ाई के बाद साल 1890 में अमेरिका में नेशनल अमेरिकन वुमेन सफरेज एसोसिएशन का गठन किया गया था। इस संगठन में महिलाओं को वोट डालने का अधिकार देने की मांग रखी गई थी। इस मांग के बाद साल 1920 में महिलाओं को अमेरिका में वोटिंग डालने का अधिकार मिला था। जिसके बाद साल 1971 में अमेरिकी संसद ने हर साल 26 अगस्त के दिन महिला समानता दिवस यानी की वुमेन्स इक्वैलिटी डे को मनाने की घोषणा की गई थी। ऐसे इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई। पहली बार महिला समानता दिवस अमेरिका में मनाया गया था। जिसके बाद धीरे-धीरे पूरी दुनिया में महिला समानता दिवस मनाया जाने लगा।

क्यों हैं इस दिन का इतना महत्व - 


महिलाएं अपने अधिकार के लिए आज भी लड़ रही हैं। घर से लेकर ऑफिस तक उनकी लड़ाई जारी है।  महिलाओं को हर समय पुरुषों और समाज की पुरुषवादी सोच का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद भी कई महिलाओं ने बड़ी से बड़ी जिम्मेदारियां निभाकर यह साबित भी कर दिया है कि वह किसी भी काम में पुरुषों से कम नहीं हैं। अगर उनको भी समाज में पुरुषों के सम्मान अधिकार मिलें तो वह अपनी जिम्मेदारियों को बहुत अच्छे से निभा सकती हैं।


सन् 2022 के लिए थीम- 


 "सेलिब्रेटिंग  वुमेंस राइट टू वोट है इस बार की थीम"

इन खास दिनों को मनाने के लिए हर साल कोई न कोई खास थीम जरुर रखी जाती है। इस साल महिला समानता दिवस की थीम 'सेलिब्रेटिंग वुमेंस राइट टू वोट है।'

("पंजाब केसरी" से साभार)

Friday, August 19, 2022

19 अगस्त - विश्व फोटोग्राफी दिवस


तस्वीरें जो एक याद के रूप में कैद की जाती हैं। छोटे से लम्हे की तस्वीर खींचकर पल को हमेशा के लिए सजा कर रख सकते हैं। तस्वीर खींचना भी एक कला है। तस्वीरों के महत्व को बताने के लिए हर साल 19 अगस्त यानी आज के दिन विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस फोटोग्राफी की कला, विज्ञान और उसके इतिहास का एक वार्षिक, विश्वव्यापी उत्सव है। फोटोग्राफी किसी व्यक्ति की भावनाओं और पर्सेनेलिटी को व्यक्त करने का एक जरिया है। हेनरिक इबसेना की एक प्रसिद्ध कहावत भी है। जिसमें हेनरिक ने कहा है कि - 'एक तस्वीर एक हजार शब्दों के बराबर होती है'(A Picture Is Worth A Thousand Words). कई बार तस्वीरें शब्दों से ज्यादा व्यक्ति की भावना व्यक्त करती हैं।

विश्व फोटोग्राफी दिवस का महत्व - 

विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाने की शुरुआत 9 जनवरी, 1839 को फ्रांस में की गई थी। उस समय फोटोग्राफी प्रक्रिया की घोषणा की गई थी। इस प्रक्रिया को डॉगोरोटाइप प्रक्रिया कहते हैं। इसी प्रक्रिया को फोटोग्राफी दुनिया की पहली प्रक्रिया कहा जाता है। आपको बता दें कि इस प्रक्रिया का आविष्कार फ्रांस के जोसेफ नाइसफोर और लुइस डॉगेर ने किया था। इसके बाद 19 अगस्त 1839 के दिन फ्रांस की सरकार ने इस आविष्कार की घोषणा की थी और इसका पेटेंट हासिल किया था, इसी दिन को याद रखने के लिए विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया जाता है।

सन् 2022 के लिए विश्व फोटोग्राफी दिवस की थीम क्या थी ?- 

आपको बता दें कि विश्व फोटोग्राफी दिवस साल 2022 की थीम 'लैंस के माध्यम से महामारी का लॉकडाउन' थी। यह थीम रखने का कारण था कि हम कैमरे के माध्यम से महामारी के चलते हुए लॉकडाउन को कैसे देखते हैं। कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था। इसी अवधि में कई लोगों ने फोटोग्राफी के शानदार सीखी थी। 


इस समय ली गई थी पहली सेल्फी -  

आज बेशक हर कोई सेल्फी ले रहा है, लेकिन दुनिया की पहली सेल्फी आज से 182 वर्ष पहले ली गई थी। यह सेल्फी 1839 में अमेरिका के रॉबर्ट कॉर्नेलियस ने ली थी। उस समय यह कोई भी नहीं जानता था कि सेल्फी होती क्या है, परंतु रॉबर्ट कॉर्नेलियस ने इस नई पहल के साथ फोटोग्राफी की एक नई शुरुआत की थी। रॉबर्ट कार्नेलियस की द्वारा ली गई तस्वीर आज भी यूनाइटेड स्टेट लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस प्रिंट में सजा कर रखी गई है।

भारत की प्रथम व्यावसायिक महिला फोटोग्राफर कौन थी ?


होमी ब्यावर वाला भारत की पहली व्यावसायिक महिला फोटोग्राफर थीं।