Wednesday, May 12, 2021

12 मई - विश्व नर्स दिवस

 


आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन 12 मई के दिन विश्व नर्स दिवस मनाया जाता है। फ्लोरेंस नाइटिंगेल एक नर्स थी। उन्होंने 19वीं सदी में युद्ध के दौरान घायल सैनिकों की मरहम-पट्टी और इलाज किया था। उन्होंने अन्य कई महिलाओं को नर्सिंग करना सिखाना शुरू किया और उनको नर्सिंग की ट्रेनिंग दी। रात में फ्लोरेंस नाइटिंगेल हाथ में एक लैंप लेकर अस्पताल के वार्डों में घूमती रहती थीं। इसलिए उन्हें "लेडी विद द लैंप" कहा जाने लगा।

सन् 1860 में फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने लंदन में सेंट थॉमस अस्पताल की स्थापना की। यह अस्पताल दुनिया का पहला नर्सिंग स्कूल था जहां मरीजों के इलाज के साथ महिलाओं हेतु नर्सिंग के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था थी। फ्लोरेंस नाइटिंगेल को सन् 1907 में ऑर्डर ऑफ मैरिट से सम्मानित किया गया था।

रोगी की देखभाल करने के लिए एक प्रशिक्षित व अनुभवी नर्स होना बहुत आवश्यक है। नर्स की सेवा और देखभाल के बिना किसी रोगी का स्वस्थ होना संभव नहीं है। इन्ही नर्सों के समाज में योगदान को सम्मान देने के लिए विश्व नर्स दिवस मनाया जाता है।

Saturday, May 8, 2021

8 मई - विश्व थैलेसीमिया दिवस

 


थैलेसीमिया रोग रक्त से संबंधित बीमारी है। यह  निश्चित तौर पर एक अनुवांशिक रोग है। इसमें रोगी के शरीर में रक्त निर्माण नहीं हो पाता या बहुत कम मात्रा में नया रक्त बनता है जिस वजह से मरीज को बार-बार बाहरी तरीके से खून चढ़ा कर रक्त की कमी पूरी की जाती है। 

थैलेसीमिया रोग बच्चे को जन्म से ही हो जाता है। इसलिए बच्चे के साथ उसके माता-पिता और पूरा परिवार इस रोग के कष्ट को झेलते हैं। विश्व थैलेसीमिया दिवस के मानने के पीछे यही उद्देश्य है कि संसार में किसी माता-पिता को इस रोग का दंश न झेलना पड़े। 

थैलेसीमिया रोग के बारे में देश के प्रत्येक नागरिक को जागरूक करना, रोग से संबंधित जानकारी देना यह दिन मनाये जाने का खास कारण है।

 इस रोग का अभी तक कोई सफल इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। जो भी उपाय किये जाते हैं वह महज मरीज की जिंदगी कुछ साल आगे बढ़ा देते हैं। थैलेसीमिया एक जन्मजात और अनुवांशिक बीमारी है। यह माता-पिता या दोनों में से किसी एक के जिंस में असामान्यता के कारण बच्चों में प्रकट होता है। मानव रक्त हीमोग्लोबिन से बनता है और हीमोग्लोबिन दो तरह के प्रोटीन से मिलकर बनता है-  अल्फा व बीटा ग्लोबिन। इन दो प्रोटीन में से किसी एक के जिंस में कोई असामान्य बदलाव होने पर थैलेसिमिया रोग होता है।  रक्त के जिंस में बदलाव के कारण खून का एक आवश्यक भाग "लाल रक्त कण" RBC नहीं बन पाते। यदि थोड़े बहुत बनते भी हैं तो वे लंबे समय तक जिंदा नहीं रह पाते। जिससे इससे पीड़ित बच्चे को खून चढ़ाने की जरूरत होती है। यदि रोगी को कोई बाहरी चोट लगने से रक्तस्राव होने लगता है तो रक्त लगातार बहता रहता है क्योंकि इस रोग में खून का थक्का नहीं जम पाता। ऐसे बच्चों को आइरन की गोलियां और बार-बार खून चढ़ाना यही एकमात्र उपचार दिया जाता है। लेकिन बार-बार खून चढ़ाने,आइरन की गोलियां देने से रोगी के खून में लौह तत्व की अधिकता हो जाती है। कुछ वर्षों के बाद लिवर,स्प्लीन व ह्रदय की धमनियों में लौह तत्व जमा होने से ये अपना काम सही तौर पर नहीं कर पाते।

थैलेसीमिया से बचाव के उपाय - 

चूंकि इस रोग का कोई इलाज नहीं है अतः रोग से बचाव हेतु सावधानी रखना ही एकमात्र उपाय है। यदि हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे इस बीमारी से दूर रहें तो विवाह के पहले लड़का व लड़की की स्वास्थ्य कुंडली या हैल्थ कुंडली मिलान जरूरी है।

 क्या है स्वास्थ्य कुंडली - 

स्वास्थ्य कुंडली में महिला तथा पुरूष दोनों के रक्त की जांच की जाती है। इसमें थैलेसीमिया, एड्स, हैपेटाइटिस-बी और सी, आरएच फैक्टर से संबंधित जांच की जाती है। इस प्रकार की जांच नाममात्र के शुल्क पर और कई सामाजिक संस्थायें तो बिल्कुल निःशुल्क भी करती हैं।