थैलेसीमिया रोग रक्त से संबंधित बीमारी है। यह निश्चित तौर पर एक अनुवांशिक रोग है। इसमें रोगी के शरीर में रक्त निर्माण नहीं हो पाता या बहुत कम मात्रा में नया रक्त बनता है जिस वजह से मरीज को बार-बार बाहरी तरीके से खून चढ़ा कर रक्त की कमी पूरी की जाती है।
थैलेसीमिया रोग बच्चे को जन्म से ही हो जाता है। इसलिए बच्चे के साथ उसके माता-पिता और पूरा परिवार इस रोग के कष्ट को झेलते हैं। विश्व थैलेसीमिया दिवस के मानने के पीछे यही उद्देश्य है कि संसार में किसी माता-पिता को इस रोग का दंश न झेलना पड़े।
थैलेसीमिया रोग के बारे में देश के प्रत्येक नागरिक को जागरूक करना, रोग से संबंधित जानकारी देना यह दिन मनाये जाने का खास कारण है।
इस रोग का अभी तक कोई सफल इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। जो भी उपाय किये जाते हैं वह महज मरीज की जिंदगी कुछ साल आगे बढ़ा देते हैं। थैलेसीमिया एक जन्मजात और अनुवांशिक बीमारी है। यह माता-पिता या दोनों में से किसी एक के जिंस में असामान्यता के कारण बच्चों में प्रकट होता है। मानव रक्त हीमोग्लोबिन से बनता है और हीमोग्लोबिन दो तरह के प्रोटीन से मिलकर बनता है- अल्फा व बीटा ग्लोबिन। इन दो प्रोटीन में से किसी एक के जिंस में कोई असामान्य बदलाव होने पर थैलेसिमिया रोग होता है। रक्त के जिंस में बदलाव के कारण खून का एक आवश्यक भाग "लाल रक्त कण" RBC नहीं बन पाते। यदि थोड़े बहुत बनते भी हैं तो वे लंबे समय तक जिंदा नहीं रह पाते। जिससे इससे पीड़ित बच्चे को खून चढ़ाने की जरूरत होती है। यदि रोगी को कोई बाहरी चोट लगने से रक्तस्राव होने लगता है तो रक्त लगातार बहता रहता है क्योंकि इस रोग में खून का थक्का नहीं जम पाता। ऐसे बच्चों को आइरन की गोलियां और बार-बार खून चढ़ाना यही एकमात्र उपचार दिया जाता है। लेकिन बार-बार खून चढ़ाने,आइरन की गोलियां देने से रोगी के खून में लौह तत्व की अधिकता हो जाती है। कुछ वर्षों के बाद लिवर,स्प्लीन व ह्रदय की धमनियों में लौह तत्व जमा होने से ये अपना काम सही तौर पर नहीं कर पाते।
थैलेसीमिया से बचाव के उपाय -
चूंकि इस रोग का कोई इलाज नहीं है अतः रोग से बचाव हेतु सावधानी रखना ही एकमात्र उपाय है। यदि हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे इस बीमारी से दूर रहें तो विवाह के पहले लड़का व लड़की की स्वास्थ्य कुंडली या हैल्थ कुंडली मिलान जरूरी है।
क्या है स्वास्थ्य कुंडली -
स्वास्थ्य कुंडली में महिला तथा पुरूष दोनों के रक्त की जांच की जाती है। इसमें थैलेसीमिया, एड्स, हैपेटाइटिस-बी और सी, आरएच फैक्टर से संबंधित जांच की जाती है। इस प्रकार की जांच नाममात्र के शुल्क पर और कई सामाजिक संस्थायें तो बिल्कुल निःशुल्क भी करती हैं।

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