11 अप्रेल - सुरक्षित मातृत्व दिवस -
गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के बेहतर स्वास्थ्य हेतु जन साधारण को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 11 अप्रेल को सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है। महात्मा गांधीजी की पत्नी कस्तूरबा गांधी की जयंती के दिन उनकी याद में यह दिन मनाया जाता है।
भारत विश्व का पहला ऐसा देश है जिसने 11 अप्रेल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाने की शुरुआत की। वैश्विक संस्था "व्हाइट रिबन अलायंस फॉर सेफ मदरहुड" नामक संगठन के द्वारा भारत में किये गए सर्वे के बाद केंद सरकार ने संस्था की पहल पर कस्तूरबा गांधी की जयंती पर सुरक्षित मातृत्व दिवस का आरंभ किया।
गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं की देखभाल, उनके पौषक आहार व प्रसव संबंधित सावधानियों के बारे में जागरूकता फैलाने हेतु हर वर्ष कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
मौजूदा NDA सरकार ने प्रसव के दौरान महिलाओं की होने वाली मृत्यु की बढ़ती दर पर ध्यान केंद्रित किया व इसे न्यूनतम करने हेतु बहुत सी योजनायें बनाई। PMSMA प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान इनमे प्रमुख है जिसकी शुरुआत 2016 में की गई थी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन संचालित होने वाली इस योजना का मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नीचे लाना है। और योजना अपने उद्देश्य में काफी हद तक सफल भी हो रही है। गम्भीर बीमारियों से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं को प्रसव के दौरान और उसके उपरांत होने वाली मृत्यु से बचाने में भी यह योजना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
31 दिसंबर 2016 को एक अन्य योजना "गर्भावस्था सहायता योजना केंद्र द्वारा शुरू की गई। जिसमें प्रसव पश्चात महिलाओं को 6000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
केंद्र सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए मातृ अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ा कर 26 सप्ताह कर दिया है जिससे संगठित क्षेत्र में कार्य करने लगभग 18 लाख महिलाओं को इससे लाभ होगा। जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की देखरेख और नवजात शिशु को माता का भरपूर स्नेह मिले, मातृ अवकाश में बढ़ोतरी करने का मुख्य उद्देश्य है। जिस कंपनी या कारखाने में 50 या इससे अधिक कर्मचारी काम करते हों, वहां एक क्रेच यानि झूलाघर होना भी आवश्यक है।
सरकार के इन प्रयासों से हाल के वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकेतकों में देश ने पर्याप्त सुधार किया है। नव शिशु मृत्यु दर( IMR ), मातृ मृत्यु दर ( MMR ), कुल प्रजनन दर (TFR) पिछले सालों की तुलना में उल्लेखनीय प्रगति की है।

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