गौरैया दिवस 20 मार्च को मनाया जाता है। किसी जमाने में छोटी-सी चिड़िया की चहक से हर घर में रौनक बनी रहती थी। आज यह स्थिति आ गई है कि गौरेया जाति को संरक्षण के साथ संवर्धन की जरूरत हो गई है। आखिर गौरेया दिवस मनाने की आव्यश्यकता क्यों है, आइए जानते हैं ।
1.गौरैया की घटती संख्या –
शहरीकरण, जंगलों की कटाई, और मोबाइल टावरों से निकलने वाली रेडिएशन के कारण गौरैया की संख्या तेजी से कम हो रही है।
घरों में पुराने तरीके की वास्तुकला (जैसे मिट्टी की दीवारें और लकड़ी की छतें) कम होने से गौरैया को घोंसला बनाने की जगह नहीं मिल रही।
2.पर्यावरण संतुलन में भूमिका –
गौरैया छोटे-छोटे कीट-पतंगों को खाकर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखती है।
यह किसान मित्र पक्षी भी है क्योंकि यह फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को खत्म करती है।
3.संरक्षण के प्रयास –
कई संगठनों ने गौरैया बचाने के लिए विशेष अभियान चलाए हैं।
कई राज्यों में गौरैया को राज्य पक्षी घोषित किया गया है, जैसे कि दिल्ली और बिहार।
गौरैया को बचाने के उपाय-
१. घर के आंगन या छत पर पानी के सकोरे और दाना रखें।
२. पेड़-पौधे लगाएं ताकि उन्हें घोंसला बनाने की जगह मिल सकेकड़ी या मिट्टी के छोटे घोंसले (बर्ड हाउस) उपलब्ध कराएं।
३. मोबाइल टावरों की संख्या और उनके रेडिएशन को नियंत्रित करने की पहल करें।
कुल मिला कर हम कह सकते हैं कि गौरैया सिर्फ एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण और जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर इसे बचाने के लिए सही कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह सिर्फ तस्वीरों और कहानियों में हो देखने को मिलेगी।

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