यूनेस्को और इससे जुड़े दूसरे संगठनों की ओर से हर साल 23 अप्रैल को 'विश्व पुस्तक दिवस' मनाया जाता है. इसे विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस (World Book and Copyright Day) भी कहा जाता है. यह किताबों के आनंद और पढ़ने की कला को बढ़ावा देने का अवसर देता है।
विश्व पुस्तक दिवस के तौर पर यूनेस्को ने 23 अप्रैल का चयन विलियम शेक्सपियर, मिगुएल केरवेंट्स और इंका गार्सिएल्सो डे ल वेगा को श्रृद्धांजलि देने के लिए किया क्योंकि इनकी मौत इसी दिन हुई थी। इस तारीख पर यूनेस्को ने 1995 अपनी पेरिस में हुई एक जनरल कांफ्रेंस में मुहर लगाई थी ताकि किताबों और लेखकों को दुनिया भर में सम्मान मिले। भारत मेें पुुुस्तक दिवस की शुरुआत सन् 2001 मेंं हुई.
क्या है वर्ल्ड बुक डे का उद्देश्य ?
दुनिया भर में किताबों के महत्व को दिखाने के विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है। किताबों को इतिहास और भविष्य के बीच एक पुल की तरह माना जाता है। इस दिन यूनेस्को और इसके दूसरे सहयोगी संगठन अगले एक साल के लिए एक 'वर्ल्ड बुक कैपिटल' का चयन करते हैं ताकि वहां पर अगले एक साल के लिए किताबों के इर्द-गिर्द चलने वाले कार्यक्रम करवाए जाएं। साल 2019 के लिए वर्ल्ड बुक कैपिटल संयुक्त अरब अमीरात का शहर शारजाह था। इसके अगले साल यानि 2020 में मलेशिया का कुआलालंपुर शहर वर्ल्ड बुक कैपिटल बना।
इस दिन के जरिए यूनेस्को का उद्देश्य दुनिया भर के लोगों के बीच साक्षरता को बढ़ावा देना और सभी तक शैक्षणिक संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित करना होता है। इनमें खास तौर से किताबों की इंडस्ट्री के लोग जिनमें लेखक, प्रकाशक, शिक्षक, लाइब्रेरियन, सार्वजनिक और प्राइवेट संस्थाओं, मानव अधिकारों को बढ़ावा देने वाले NGO आदि शामिल रहते हैं।
क्या थी सन् 2019 का थीम?
यूनेस्को के डायरेक्टर जनरल ऑद्रे अजोले ने 2019 के लिए थीम का खुलासा इस तरह किया, "किताबें सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का एक रूप हैं जो चुनी गई (किताब लिखने के लिए) भाषा में और उसके जरिए जीती है। हर प्रकाशन एक भाषा विशेष में होता है और उस भाषा विशेष के पाठक के लिए होता है। एक किताब किसी भाषाई और सांस्कृतिक परिवेश में लिखी, बनाई गई, बदली गई, प्रयोग की गई होती है और उसकी तारीफ भी उसी परिवेश में होती है। इस साल हम इस महत्वपूर्ण पहलू पर जोर दे रहे हैं क्योंकि यूनेस्को के जरिए 2019 को स्थानीय भाषाओं का अंतरराष्ट्रीय वर्ष भी घोषित किया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लोगों की स्थानीय संस्कृति, ज्ञान और अधिकारों की रक्षा की प्रतिबद्धता को पुख्ता किया जा सके।
पुस्तकें क्यों जरूरी है ?
23 अप्रैल को पूरी दुनिया में विश्व पुस्तक और प्रकाशनाधिकार दिवस मनाया जाता है। इसे ही विश्व पुस्तक दिवस एवं किताबों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस भी कहा जाता है। अच्छी पुस्तकों का प्रकाशित होना, पढ़ा जाना एवं सहेजा जाना बहुत आवश्यक है। इसलिए इस दिवस को मनाया जाता है। सन् 1995 में पहली बार विश्व पुस्तक और प्रकाशन अधिकार दिवस मनाने की तारीख यूनेस्को द्वारा तय की गई थी। किताबें ज्ञानवर्धन करती है, साथ ही वे हमारा मनोरंजन भी करती हैं। किताबें भाषा-ज्ञान और बुद्धि विकास करती हैं। किताबें पढ़ने से मानसिक बल में वृद्धि के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। लेकिन जब से मनोरंजन के अन्य साधन आ गए हैं तब से लोग किताबें पढ़ना कम कर चुके हैं। किताबें हमारी विरासत का खजाना है। वर्तमान समय में बच्चों के हाथ से मोबाइल छुड़ाकर उन्हें अच्छी किताबें देना चाहिए और उन्हें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहना चाहिए।
अच्छी व प्रसिद्ध लेखकों की पुस्तकें एक इंसान की जिंदगी बदल सकती हैं। पुस्तक पढ़िए और उन्हें सहेजिये। सम्हाल कर रखिये,अगली पीढ़ी को धन-संपत्ति ट्रांसफर करने की तरह पुस्तकों का उपहार दीजिये।

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